मधु के फोन में अचानक एक मैसेज पॉप-अप हुआ। "कैसी हो, मधु?" सामने अंजान नंबर था, लेकिन उस संदेश में एक पुरानी यादें ताजा हो गईं। यह सचिन का मैसेज था—कॉलेज का पहला प्यार, वो इंसान जिसने कभी मधु के दिल के तार छेड़े थे। यह वही सचिन था जो उसकी शादी के बाद कहीं खो गया था, मगर आज, शादी के पांच साल बाद, उसका ये मैसेज मानो उसकी ज़िंदगी में भूचाल ले आया।
मधु की शादीशुदा जिंदगी बस एक दैनिक दिनचर्या बन चुकी थी। उसके पति, राजेश, एक नेक इंसान थे लेकिन समय के साथ उनकी शादी से वो जोश और
जुनून कहीं खो गए थे। मधु दिन भर घर और बच्चों के कामों में इतनी उलझी रहती कि अपनी भावनाओं के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता। उसकी ज़िन्दगी में वो कोई नहीं था जिससे वह दिल खोलकर बात कर सके, अपने सपनों और इच्छाओं के बारे में बता सके। वो बस अपने बीते दिनों की मिठास में खो जाने की लालसा महसूस कर रही थी, जो शायद सचिन के साथ लौट सकती थी।

मधु और सचिन की कहानी एक बार फिर नए सिरे से शुरू हो चुकी थी। सचिन ने भी अपने जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखे थे और अब वो एक दोस्त के रूप में मधु के जीवन में लौटना चाहता था। उनकी हर बात में कॉलेज की यादें ताजा हो जाती थीं। वो घंटों चैट करते और पुरानी बातें करते हुए खुद को एक बार फिर युवावस्था के दिनों में महसूस करते।

वो फिर सवाल उठता है: क्या मधु का ये जुड़ाव सचिन के साथ बस एक पुरानी यादों का सहारा है? क्या यह उसके दिल के खालीपन को भरने की कोशिश है?
एक शाम जब मधु की बातों में राजेश ने एक अलग सी उमंग देखी तो उसने धीरे से पूछ लिया, "आजकल तुम खुश नजर आ रही हो, क्या वजह है?" मधु का चेहरा लाल हो गया। वो सोचने लगी कि क्या सचिन के साथ ये बातें उसकी शादीशुदा जिंदगी के प्रति बेवफाई हैं, या बस उसका दिल किसी की सुनवाई चाहता है?

दुविधा की गहराई: एक तरफ उसका विवाहित जीवन था, जिसमें उसकी जिम्मेदारियां, सामाजिक नियम, और एक स्थायित्व था। दूसरी ओर सचिन के साथ उसकी बातचीत, जिसमें उसे एक अलग सा अपनापन और आजादी महसूस होती थी। समाज में अक्सर महिलाएं शादी के बाद अपनी भावनाओं को दबा देती हैं। उनकी दिली ख्वाहिशें अधूरी रह जाती हैं, पर उन्हें कभी कहने का मौका नहीं मिलता।

क्या मधु अपने इस अनजान सफर में जाएगी, या फिर वो अपनी जिम्मेदारियों और शादीशुदा जीवन को प्राथमिकता देगी?
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